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ख़ुद को खफ़ा क्यों करते हो

अकेला दीया

समुंदर के सफ़र पर

किनारा दूर है साथी

रूठने वाले

तेरा एहसास

कोई कितना भी कहे

काश शायरी जैसी...

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